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July 15, 2009


रात भर तन्हा रहा,


दिनभर अकेला मैं हीं था ,


शहर की आबादियों में


अपने जैसा मैं ही था ।


मैं ही दरिया मैं ही तूफान,


मैं ही था हर मौज भी,


मैं ही ख़ुद को पी गया,


सदियों से प्यासा मैं ही था.

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